देश के लिए शहीद हुए बेटे को मिला शौर्य चक्र, मां को 22 साल बाद भी जमीन नहीं मिली; सिस्टम से हारकर बोलीं- सम्मान वापस ले लो – shauryachakra martyr vivek saxena family struggles 22 years returns awards sarojininagar lcln

देश के लिए शहीद हुए बेटे को मिला शौर्य चक्र, मां को 22 साल बाद भी जमीन नहीं मिली; सिस्टम से हारकर बोलीं- सम्मान वापस ले लो – shauryachakra martyr vivek saxena family struggles 22 years returns awards sarojininagar lcln

देश की हिफाजत में जान न्योछावर करने वाले शौर्य चक्र विजेता शहीद का परिवार 22 साल बाद भी अपने ही हक के लिए सिस्टम की चौखटों पर घिसट रहा है. सरोजनीनगर तहसील में आयोजित ‘संपूर्ण समाधान दिवस’ में उस वक्त सन्नाटा पसर गया, जब शहीद सहायक कमांडेंट स्व. विवेक सक्सेना की 80 वर्षीय बुजुर्ग मां सावित्री सक्सेना ने बेबसी में आकर बेटे को मिले सभी वीरता पदक और सम्मान राशि सरकार को लौटाने की मांग रख दी.

शहीद के बड़े भाई रंजीत सक्सेना अपनी बुजुर्ग मां के सहारे समाधान दिवस पहुंचे थे. आजतक से बात करते हुए रंजीत ने तंत्र की असंवेदनशीलता की जो परतें खोलीं, वो रूह कंपा देने वाली हैं. उन्होंने बताया कि जब शनिवार को समाधान दिवस में पहुंचे तो अफसरों की हेकड़ी का सामना करना पड़ा. रंजीत के मुताबिक, तहसीलदार ने मुंह पर कह दिया कि जमीन ले तो पाओगे नहीं, जैसे वर्षों से भाग रहे हो, वैसे ही भागते रहोगे. यह इस तरह से होगा ही नहीं, अब फाइल नगर निगम जाएगी और बैठक में तय होगा.

दर्द बयां करते हुए रंजीत ने बताया कि शहीद के परिवार को केंद्र, राज्य और घटनास्थल वाली सरकार से नियमानुसार सुविधाएं मिलती हैं. शहादत के बाद स्मारक पार्क बनाने और ग्रामीण कोटे से भूमि आवंटन का ऐलान हुआ था, जो बरसों तक सिर्फ कागजी घोषणाओं में अटका रहा. साल 2016 में तत्कालीन डीएम राजशेखर ने मामले को संज्ञान में लेकर अलग-अलग विभागों के लिए आवेदन लिए और एडीएम को 15 दिन में जांच कर स्मारक व भूमि आवंटन के निर्देश दिए. 2016 में जमीन की प्रक्रिया तो शुरू हुई, लेकिन उसके बाद शुरू हुआ मूल निवास का अंतहीन चक्रव्यूह. 

अफसरों ने शहीद के परिवार को यह साबित करने पर मजबूर कर दिया कि वे यूपी के निवासी हैं या नहीं. रंजीत ने बताया, हम यहीं पले-बढ़े, यहीं पढ़े और एयरफोर्स स्टेशन मेमरा में भाई का मोमेंटो बना है, फिर भी हमसे कहा गया कि सुविधाएं तभी मिलेंगी जब शादी से पहले माताजी कहां रहती थीं, इसका एफिडेविट दो. हमने एफिडेविट दिया तो आधी-अधूरी बात पकड़कर कह दिया कि आप यहां के मूल निवासी नहीं हैं, सुविधाएं नहीं मिलेंगी.

इसके बाद रंजीत को पुराने कागजों में यूपी सरकार की ओर से इसी पते पर जारी 75000 के चेक की रसीद मिली, जिसे देखकर अफसरों के होश उड़े कि जब पैसा इसी पते पर दिया था तो मूल निवासी होने का सबूत कैसे मांग रहे हैं. शौर्य चक्र की सम्मान धनराशि पाने के लिए भी परिवार को 2024 तक इंतजार करना पड़ा. उसमें भी फाइल को एक टेबल से दूसरी टेबल तक खिसकाने में महीनों लग गए, क्योंकि अफसर वेरिफिकेशन से बचते रहे ताकि परिवार आगे कोई और दावा न कर दे.

दरोगा खेड़ा स्थित कृष्ण लोक कॉलोनी में रहने वाली 80 वर्षीय सावित्री देवी अब पूरी तरह टूट चुकी हैं. उनका कहना है कि 8 जनवरी 2003 को मणिपुर में आतंकवादियों से लड़ते हुए बेटे ने शहादत दी थी, जिसके लिए शौर्य चक्र और राष्ट्रपति पुलिस पदक मिला. लेकिन 80 साल की उम्र में अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की हिम्मत नहीं बची.

बुजुर्ग मां ने राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री से मुलाकात का वक्त मांगते हुए गुहार लगाई है कि जब शहादत के 21 साल बाद भी एक जमीन के लिए अपमानित होना पड़े, तो सरकार यह शौर्य चक्र, पदक और सम्मान राशि वापस ले ले. वहीं, मामले में एसडीएम ने शिकायतों की जांच कर एक हफ्ते के भीतर गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के आदेश दिए हैं.

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