उत्तर प्रदेश के बरेली में पुलिस ने फर्जी आयुर्वेदिक दवा कंपनी चलाकर लोगों से ठगी करने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि गिरोह भ्रामक ऑनलाइन विज्ञापनों के जरिए ग्राहकों को आकर्षित करता था और बिना वैध लाइसेंस के नकली आयुर्वेदिक उत्पाद बेचता था. बारादरी पुलिस ने शनिवार को यादगार रेस्टोरेंट के पास स्थित फर्म पर छापा मारकर इस नेटवर्क का खुलासा किया.
अपर पुलिस अधीक्षक (नगर) मानुष पारीक ने बताया कि पुलिस को इस अवैध गतिविधि की सूचना मिली थी. इसके बाद टीम ने मौके पर कार्रवाई की. पुलिस के मुताबिक, आरोपी वहां लैपटॉप, मोबाइल फोन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मदद से कॉल सेंटर चला रहे थे. नकली वेबसाइट और ऑनलाइन विज्ञापनों के जरिए आयुर्वेदिक दवाओं के ऑर्डर लिए जाते थे.
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छापेमारी के दौरान पुलिस ने 75 पैकेट नकली दवाएं बरामद कीं. इनमें ‘Diabo Diabetic Powder’ और ‘Brahm Sugar Care’ नाम से बेचे जा रहे उत्पाद शामिल हैं. इसके अलावा फर्जी बिल और शिपिंग लेबल भी मिले. पुलिस ने मौके से जादोपुर, भोजीपुरा निवासी साजिद मलिक, एजाज नगर गौटिया निवासी इस्लाम और पशुपति विहार निवासी मोहम्मद जफर को गिरफ्तार किया.
वेबसाइट और फर्जी बिल से जीतते थे भरोसा
पुलिस की पूछताछ में साजिद मलिक ने कथित तौर पर बताया कि वेबसाइट और फोन कॉल के जरिए ऑर्डर हासिल किए जाते थे. ग्राहकों का भरोसा जीतने के लिए अलग-अलग कंपनियों के नाम पर फर्जी बिल तैयार किए जाते थे. इसके बाद तैयार पार्सल को कूरियर सेवा के जरिए ग्राहकों तक भेज दिया जाता था.
पुलिस के अनुसार, आरोपी नकली उत्पादों की बिक्री के लिए ऑनलाइन माध्यम का इस्तेमाल कर रहे थे. इस नेटवर्क में तकनीकी काम संभालने वाले इस्लाम की भी अहम भूमिका बताई गई है. पूछताछ में उसने कथित तौर पर बताया कि वह फेसबुक पर भ्रामक विज्ञापन तैयार करता था.
इन विज्ञापनों में बीमारियों को महज तीन दिन में ठीक करने का दावा किया जाता था. पुलिस के मुताबिक, इस्लाम ने Shopify पर एक वेबसाइट भी बनाई थी. इसके जरिए ग्राहकों से ऑर्डर लिए जाते और दवाओं के पार्सल कैश ऑन डिलीवरी के माध्यम से भेजे जाते थे.
तीन आरोपी गिरफ्तार, जांच जारी
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, नकली दवाओं, बिल और शिपिंग लेबल को जांच के लिए कब्जे में लिया है. अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस फर्जी कंपनी के जरिए कितने लोगों को उत्पाद बेचे गए और नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं.
इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66D के तहत एफआईआर दर्ज की गई है. पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और ऑनलाइन ठगी के इस नेटवर्क से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है.
फिलहाल पुलिस का कहना है कि मामले में आगे की जांच जारी है. बरामद सामान और आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर फर्जी वेबसाइट, ऑनलाइन विज्ञापनों और नकली आयुर्वेदिक उत्पादों की बिक्री से जुड़े पूरे नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है.
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