अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से अपनी विदेश नीति का बड़ा खाका दुनिया के सामने रखा. करीब 37 मिनट के भाषण में ईरान सबसे बड़ा मुद्दा रहा. इसके अलावा गाजा की जंग, यूक्रेन युद्ध, ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी, वेनेजुएला के साथ तेल समझौता, क्यूबा, भारत-पाकिस्तान और तेजी से बढ़ती AI तकनीक पर भी ट्रंप ने अपनी बात रखी.
अमेरिका की सैन्य ताकत का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा कि उनके नेतृत्व में अमेरिका पहले से ज्यादा मजबूत है. उन्होंने दावा किया कि मौजूदा कार्यकाल में अमेरिका सैन्य खर्च पर 1.5 ट्रिलियन डॉलर खर्च करेगा. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अब सिर्फ बात नहीं कर रहा, बल्कि कार्रवाई कर रहा है. भाषण में उन्होंने दुनिया के अलग-अलग मुद्दों को अमेरिकी ताकत और उसकी भूमिका से जोड़कर पेश किया.
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ईरान पर सबसे ज्यादा तल्खी, खात्मे तक की बात
ट्रंप के भाषण में सबसे ज्यादा तल्खी ईरान को लेकर दिखी. उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु थियार हासिल करने की इजाजत नहीं दी जाएगी. ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका की वजह से ईरान ने परमाणु हथियार बनाने की कोशिशें रोक दी हैं. उन्होंने कहा कि सत्ता में लौटने के बाद ईरान से बातचीत शुरू की गई और आर्थिक मदद की पेशकश भी की गई थी, लेकिन ईरान ने प्रस्ताव ठुकरा दिया.
ट्रंप ने दुनिया के देशों से ईरान के खिलाफ पूरी आर्थिक घेराबंदी में अमेरिका का साथ देने की अपील की. उन्होंने कहा कि ईरान को तब तक अलग-थलग रखा जाना चाहिए, जब तक वह व्यापारिक जहाजों पर हमले रोकने, परमाणु हथियार छोड़ने और आतंकवाद के समर्थन को खत्म नहीं करता. ट्रंप ने यह भी सवाल उठाया कि अमेरिका को ईरान के साथ समझौता करना चाहिए या इस्लामिक रिपब्लिक को खत्म कर देना चाहिए. हालांकि, उन्होंने साथ ही समझौते की उम्मीद जताई और नवंबर में अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के बाद डील की संभावना का संकेत दिया.
गाजा पर बोले- युद्ध खत्म किया, बंधक घर लौटे
गाजा युद्ध का जिक्र करते हुए ट्रंप ने दावा किया कि पिछली बार जब वह UN में बोले थे, तब गाजा में युद्ध जारी था और बंधक हमास की सुरंगों में थे. उन्होंने कहा कि UN महासभा के दौरान हुई बातचीत और उसके बाद के घटनाक्रम से गाजा में युद्ध खत्म हुआ और हजारों लोगों की जान बची. ट्रंप ने यह भी दावा किया कि बाकी सभी बंधकों को घर वापस लाया जा चुका है.
यूक्रेन युद्ध भी खत्म होने की उम्मीद
यूक्रेन युद्ध पर ट्रंप ने कहा कि यह जंग उम्मीद से जल्दी खत्म हो सकती है. उन्होंने कहा कि उनका प्रशासन रूस और यूक्रेन दोनों के नेताओं के साथ मिलकर समाधान निकालने पर काम कर रहा है. हालांकि, उन्होंने इसके लिए कोई तय समयसीमा या नई योजना की जानकारी नहीं दी.
ग्रीनलैंड में बढ़ेगी अमेरिकी सैन्य मौजूदगी
ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप ने अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच हुए समझौते का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इससे ग्रीनलैंड में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी बढ़ सकेगी. ट्रंप के मुताबिक, अमेरिका वहां दो बड़े सैन्य ठिकानों समेत बड़ी सैन्य मौजूदगी विकसित कर सकेगा. उन्होंने कहा कि अमेरिका की लिखित मंजूरी के बिना ग्रीनलैंड में कोई अमेरिकी विरोधी देश सैन्य मौजूदगी नहीं बना पाएगा.
वेनेजुएला से 65 अरब बैरल तेल की डील का दावा
ट्रंप ने अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तेल समझौते का भी जिक्र किया. उन्होंने इसे इतिहास की सबसे बड़ी तेल डील बताया और कहा कि इसमें 65 अरब बैरल तेल शामिल है. उनके मुताबिक, इससे दोनों देशों को फायदा होगा और दुनिया में ऊर्जा की कीमतें कम करने में मदद मिल सकती है. ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका और वेनेजुएला को मिलाकर दुनिया के 60 फीसदी से ज्यादा तेल पर नियंत्रण है.
क्यूबा पर भी ट्रंप का सख्त रुख
क्यूबा को लेकर ट्रंप ने कहा कि अमेरिका वहां बुनियादी बदलाव चाहता है. उन्होंने क्यूबा को असफल राज्य बताया और कहा कि वहां कम्युनिज्म खत्म होगा और आजादी आएगी. ट्रंप के इस बयान के दौरान क्यूबा का प्रतिनिधिमंडल UN चैंबर से बाहर चला गया.
भारत-पाकिस्तान का जिक्र, शाहबाज की तारीफ
भारत-पाकिस्तान का जिक्र करते हुए ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ की भी बात की. उन्होंने कहा कि शाहबाज ने टकराव खत्म करने और करोड़ों लोगों की जान बचाने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया था. ट्रंप ने शाहबाज को बेहतरीन इंसान बताया और दावा किया कि उन्होंने 3 करोड़ से ज्यादा लोगों की जान बचाई.
UN में सुधार और ग्लोबल टैक्स का विरोध
ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र में सुधारों का भी मुद्दा उठाया. उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने दूसरे देशों के साथ मिलकर UN में बड़े बदलाव किए हैं. उनके मुताबिक, 2026 में UN के बजट में 15 फीसदी कटौती की गई और 4,000 से ज्यादा पद खत्म किए गए. ट्रंप ने ग्लोबल टैक्स के कॉन्सेप्ट का भी विरोध किया. उन्होंने कहा कि जब तक वह राष्ट्रपति हैं, अमेरिका में कोई वैश्विक सरकार या वैश्विक टैक्स नहीं होगा.
AI नहीं, ‘सुपर इंटेलिजेंस’ कहेंगे ट्रंप
भाषण के आखिर में ट्रंप ने AI को लेकर भी अपना नजरिया रखा. उन्होंने इसे ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ की जगह ‘सुपर इंटेलिजेंस’ यानी SI कहने की बात कही. उनका तर्क था कि ‘आर्टिफिशियल’ शब्द से इंटेलिजेंस नकली जैसी लगती है. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस तकनीक को रोकने के बजाय उसके विकास को बढ़ावा देगा और सुपर इंटेलिजेंस के क्षेत्र में दुनिया की अगुवाई करता रहेगा.
कुल मिलाकर ट्रंप के UN भाषण में ईरान पर दबाव, गाजा और यूक्रेन युद्ध, ग्रीनलैंड में सैन्य मौजूदगी, वेनेजुएला के तेल समझौते, क्यूबा, भारत-पाकिस्तान, UN सुधार और AI जैसे मुद्दे छाए रहे. ट्रंप ने इन सभी मुद्दों को अमेरिका की ताकत और वैश्विक भूमिका के साथ जोड़कर दुनिया के सामने अपना रुख रखा.
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