एक तरफ उठी अर्थी, आधी रात गूंजी किलकारी: गणपति विसर्जन हादसे में पिता की मौत के कुछ घंटे बाद जन्मी बेटी – lucknow ganpati visarjan death pregnant wife gives birth baby girl lclcn

एक तरफ उठी अर्थी, आधी रात गूंजी किलकारी: गणपति विसर्जन हादसे में पिता की मौत के कुछ घंटे बाद जन्मी बेटी – lucknow ganpati visarjan death pregnant wife gives birth baby girl lclcn

लखनऊ में गणपति प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुए हादसे ने तीन परिवारों को जिंदगी भर का दर्द दे दिया. सई नदी के तेज बहाव में प्रमोद, धीरज और हरिप्रसाद की डूबने से मौत हो गई. बुधवार दोपहर जब तीनों की चिताएं शांत भी नहीं हुई थीं, उसी रात मोहनलालगंज सीएचसी में करीब 12 बजे एक नवजात की किलकारी गूंज उठी.

दरअसल, यह बच्ची हादसे में जान गंवाने वाले हरिप्रसाद की बेटी है. उनकी गर्भवती पत्नी श्यामावती ने बुधवार आधी रात एक बच्ची को जन्म दिया. जिस परिवार में कुछ घंटे पहले हरिप्रसाद की अर्थी उठी थी, उसी घर में अब नन्हीं परी ने जन्म लिया है. हालांकि, बेटी के आने की खुशी पर पिता को खोने का गम भारी है और घर में मातम का सन्नाटा पसरा हुआ है.

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दिल दहला देने वाला यह हादसा मंगलवार शाम हुआ था. गांव के अन्य लोगों के साथ प्रमोद, धीरज और हरिप्रसाद सई नदी में गणपति प्रतिमा विसर्जित करने के लिए उतरे थे. प्रमोद को तैरना आता था, इसलिए वह प्रतिमा को संभालते हुए सबसे आगे चल रहा था. धीरज और हरिप्रसाद दोनों तरफ से उसे सहारा दे रहे थे.

भारी प्रतिमा के नीचे दबा प्रमोद, बचाने कूदे दोनों दोस्त

नदी के गहरे हिस्से में पहुंचते ही अचानक प्रमोद का पैर फिसल गया. इसी दौरान भारी गणपति प्रतिमा उसके ऊपर जा गिरी. प्रतिमा के नीचे दबने के बाद प्रमोद उफनती नदी में कुछ दूरी तक डूबता दिखाई दिया. दोस्त को मुश्किल में देखकर धीरज और हरिप्रसाद ने बिना अपनी जान की परवाह किए पानी में छलांग लगा दी.

प्रमोद ने दोनों साथियों की पीठ पर हाथ रखकर खुद को संभालने और बाहर निकलने की दो बार कोशिश की. लेकिन नदी की धारा इतनी तेज थी कि तीनों को अपने साथ बहा ले गई. हादसे में तीनों की मौत हो गई. घटना के बाद परिवारों में चीख-पुकार मच गई और गांव में मातम छा गया.

प्रमोद के भाई मनोज ने बताया कि गणेश स्थापना के बाद से प्रमोद काम पर नहीं गया था. वह पूरी शिद्दत से आयोजन की सेवा में जुटा था. सोमवार की पूरी रात उसने जागरण में बिताई थी और मंगलवार दोपहर प्रतिमा विसर्जन के लिए निकला था. आगामी 15 अक्टूबर को होने वाले देवी जागरण कमेटी का अध्यक्ष भी प्रमोद को बनाया गया था.

प्रमोद के घर मातम, धीरज की पत्नी नदी किनारे करती रहीं इंतजार

प्रमोद की मौत से पिता हरिशंकर, मां रानी देवी, भाई मनोज, विनोद और सनोज के अलावा बहन संतोषी का रो-रोकर बुरा हाल है. परिवार के लिए धार्मिक आयोजन की तैयारियां कर रहा बेटा अचानक हमेशा के लिए उनसे दूर हो गया.

इस हादसे ने धीरज और हरिप्रसाद के परिवारों को भी गहरा जख्म दिया है. दोनों की पत्नियां गर्भवती हैं. धीरज ने करीब दो साल पहले अनीता से प्रेम विवाह किया था. फिलहाल अनीता गर्भवती हैं. पति के नदी में डूबने की खबर मिलने के बाद वह बदहवास हालत में घंटों नदी किनारे बैठकर शव मिलने का इंतजार करती रहीं.

वहीं, हरिप्रसाद अपने पीछे बेटे निहाल, बेटी निहालिका और अब नवजात बच्ची को छोड़ गए हैं. बेटी ने दुनिया में कदम रखा ही था कि उसके सिर से पिता का साया उठ गया. श्यामावती ने जिस समय बच्ची को जन्म दिया, उससे कुछ घंटे पहले ही परिवार ने हरिप्रसाद को अंतिम विदाई दी थी.

जिस घर से उठी थी अर्थी, वहीं गूंजी बेटी की किलकारी

हरिप्रसाद की मौत और उनकी नवजात बेटी के जन्म का यह संयोग परिवार के लिए भावनाओं का ऐसा दौर लेकर आया है, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है. एक ओर पिता की मौत का गम है, तो दूसरी तरफ घर में आई बच्ची भविष्य की उम्मीद बनकर आई है.

मोहनलालगंज सीएचसी में आधी रात करीब 12 बजे श्यामावती ने बेटी को जन्म दिया. परिवार जिस वक्त हरिप्रसाद की मौत का सदमा झेल रहा था, उसी दौरान नवजात की किलकारी सुनाई दी. नन्हीं बच्ची ने दुनिया में आने से पहले ही अपने पिता को खो दिया, लेकिन परिवार में उसकी मौजूदगी ने दुख के बीच एक नई जिंदगी की दस्तक जरूर दी है.

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