कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बीजेपी और केंद्र सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति से लेकर चुनाव आयोग के कामकाज और उनके फैसलों पर गंभीर सवाल उठाए. राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश में चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया जा रहा है और कहा कि वोट की सुरक्षा चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है.
राहुल गांधी ने कहा कि वोट देश की पूरी संवैधानिक व्यवस्था की नींव है. वोट से संविधान को शक्ति मिलती है, संविधान से कानून बनते हैं और कानूनों से संस्थाएं काम करती हैं. उन्होंने कहा कि अगर वोट की प्रक्रिया ही प्रभावित होती है तो इसका असर संविधान, कानून और संस्थाओं तक पहुंचता है.
राहुल गांधी ने कहा, ‘वोट हमारे देश की नींव है. चुनाव आयोग की जिम्मेदारी इस वोट की रक्षा करना है. अगर वोट की प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाया जाता है तो संविधान अपनी शक्ति खो देता है और उसके आधार पर बने कानून तथा संस्थाएं भी सवालों के घेरे में आ जाती हैं. यह सिर्फ वोट पर हमला नहीं है, बल्कि देश में हर नागरिक की लोकतांत्रिक भागीदारी के आधार पर हमला है.’
राहुल गांधी ने अपने आरोपों को दोहराते हुए कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनावों में गड़बड़ी हुई है. उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में इन आरोपों से जुड़े तथ्य और स्पष्ट रूप से सामने आएंगे.
ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति पर भी सवाल
राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि स्वतंत्र चुनाव आयोग के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन की प्रक्रिया कार्यपालिका के प्रभाव से मुक्त हो. उन्होंने दावा किया कि जब चुनाव आयुक्तों के चयन को लेकर चर्चा हुई तो उनके विचार को नजरअंदाज किया गया और बाद में ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति हुई.
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली चयन प्रक्रिया के जरिए हुई. उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका का भी जिक्र किया.
‘CEC को जांच से सुरक्षा देने वाला कानून आया’
राहुल गांधी ने 2023 में बनाए गए कानून का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि 21 दिसंबर 2023 को ऐसा कानून पारित किया गया, जिसके तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को उनके आधिकारिक कार्यों के संबंध में कुछ कानूनी सुरक्षा मिली. राहुल गांधी ने इस कानून को चुनाव आयोग की स्वतंत्रता के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताते हुए सवाल उठाया कि क्या इससे चुनाव आयुक्तों की जवाबदेही प्रभावित नहीं होगी.
दो चुनाव आयुक्तों की असहमतियों का किया जिक्र
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से दर्ज कराई गई अहसमतियों का भी जिक्र किया. अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज की थी. इनमें मतदाता सूची, फॉर्म-6 में बदलाव और वोटर डेटा के प्रबंधन जैसे मुद्दे शामिल बताए गए हैं.
राहुल गांधी ने कहा कि अब दो चुनाव आयुक्तों की ओर से सवाल उठाए जाने के बाद उनके पुराने आरोपों को नए संदर्भ में देखा जाना चाहिए.
हालांकि, चुनाव आयोग ने इन मतभेदों को लेकर कहा है कि किसी भी संस्थान में विचार और टिप्पणियों में अंतर होना सामान्य है. आयोग ने यह भी कहा कि उसके आदेश और फैसले कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं.
महाराष्ट्र से हरियाणा तक चुनावी प्रक्रिया पर सवाल
राहुल गांधी ने अपने भाषण में महाराष्ट्र और हरियाणा चुनावों से जुड़े अपने पुराने आरोपों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने पहले भी प्रेस कॉन्फ्रेंस और यात्राओं के दौरान चुनावी प्रक्रिया से जुड़े आंकड़ों और कथित गड़बड़ियों को सामने रखा था. उन्होंने दावा किया कि विपक्ष की ओर से लगातार सवाल उठाए जाने के बावजूद चुनाव आयोग की तरफ से इन पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई.
राहुल गांधी ने कहा कि उनके मुताबिक, चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी लगातार सामने आ रही है और आने वाले महीनों में तस्वीर और साफ होगी.
‘अगर वोट चोरी हुआ तो कानून भी सवालों में’
राहुल गांधी ने अपने पूरे भाषण में वोट, संविधान, कानून और संस्थाओं के बीच संबंध को मुख्य मुद्दा बनाया. उन्होंने कहा कि अगर संसद में चुने गए प्रतिनिधि कथित तौर पर प्रभावित चुनावी प्रक्रिया के जरिए आते हैं तो उनके द्वारा बनाए गए कानूनों की वैधता पर भी सवाल उठेंगे. यह केवल किसी एक चुनाव या किसी एक राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं है, बल्कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा सवाल है.
राहुल गांधी ने बीजेपी और चुनाव आयोग पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप भी लगाए. हालांकि, ये उनके राजनीतिक आरोप हैं और चुनाव आयोग इन आरोपों से सहमत नहीं है. आयोग ने अपने कामकाज और फैसलों को कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप बताया है.
यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है जब विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर संसद में नए प्रस्ताव की तैयारी कर रहे हैं. विपक्षी सूत्रों के मुताबिक, दोनों सदनों में नया नोटिस लाने की तैयारी है. इससे पहले 24 अप्रैल को 73 विपक्षी राज्यसभा सांसदों ने ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग वाला नोटिस दिया था, जो राज्यसभा में लंबित बताया जा रहा है.
यह खबर शुरुआती सूचनाओं के साथ प्रकाशित की गई है. जल्द नए अपडेट्स जोड़े जाएंगे.
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