अमेरिका और ईरान में तनातनी की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में वैश्विक तेल की आपूर्ति पर काफी गंभीर असर पड़ा है. तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं. हालिया हमलों के बाद अमेरिका और ईरान की परदे के पीछे चल रही बातचीत भी पटरी से उतरती दिख रही है. इस बीच साउथ कोरिया होर्मुज को लेकर बड़ा फैसला लेने जा रहा है.
होर्मुज में ‘फ्रीडम ऑफ नेविगेशन’ का समर्थन करने के लिए सैन्य संसाधनों की तैनाती की तैयारी कर रहा है. दक्षिण कोरियाई मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार, इन्हें इस वर्ष के अंत से पहले भेजने का लक्ष्य है. इन रिपोर्ट्स में सरकारी और सैन्य सूत्रों का हवाला दिया गया है.
दक्षिण कोरिया के कई मीडिया संस्थानों ने बताया कि सरकार इस तैनाती के लिए संसद की मंजूरी लेने की प्रक्रिया तैयार कर रही है. सरकार कैबिनेट की समीक्षा के बाद इस महीने संसद में सहमति प्रस्ताव पेश करने की योजना बना रही है.
सरकार जिन विकल्पों पर विचार कर रही है, उनमें समुद्री गश्ती विमान, जहाजों को लॉजिस्टिक सपोर्ट या समुद्री बारूदी सुरंगों का पता लगाने और उन्हें हटाने वाली यूनिट भेजना शामिल है. इसके अलावा दक्षिण कोरिया अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस समेत कई देशों के साथ योगदान के आकार और प्रकृति पर भी चर्चा कर रहा है.
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति कार्यालय ब्लू हाउस ने कहा कि सियोल होर्मुज में जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता में योगदान देने के व्यावहारिक तरीकों पर चर्चा कर रहा है. हालांकि, उसने उन रिपोर्ट्स को तथ्यों से अलग बताया, जिनमें कहा गया था कि सरकार ने सैन्य तैनाती का निर्णय ले लिया है.
बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अगस्त में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा था कि उन्होंने अमेरिका-दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यासों को कुछ हद तक इसलिए कम किया क्योंकि दक्षिण कोरिया ने ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका की मदद करने से इनकार कर दिया था. अब दक्षिण कोरिया का यह फैसला अमेरिका के साथ रिश्ते सुधारने की दिशा में माना जा रहा है.
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