राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में बिल्डिंग गिरने से हुए हादसे में अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है. आशंका है अभी भी मलबे में 15-20 लोग दबे हो सकते हैं. इन लोगों को बचाने के लिए देर रात तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलता रहा. इस हादसे में 10 लोग जख्मी भी हो गए, जिनमें छात्र और मजदूर शामिल हैं. इनका इलाज एम्स में चल रहा है. साउथ कैंपस थाने में इमारत के मालिक हरिराम बंसल और अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है.
बताया जा रहा है कि 40-50 साल पुरानी इस इमारत में पीजी हॉस्टल था. रविवार दोपहर जब यह हादसा हुआ, उस वक्त इमारत की बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इतनी पुरानी इमारत में पीजी कैसे था और इसे किराये के लिए क्यों रखा गया था?
कुछ लोगों के लिए यह महज हादसा हो सकता है, लेकिन कटु सच्चाई ये हैं कि ये दुर्घटना नहीं बल्कि लालच और लापरवाही के कॉकटेल का नतीजा है. हैरानी की बात है कि 40-50 साल इस पुरानी इमारत को तीन की जगह पांच मंजिल तक अवैध बना दिया गया.
क्या बिल्डिंग का नक्शा पास था?
सवाल ये भी है कि क्या इस बिल्डिंग का नक्शा पास था? पांच मंजिला इमारत बनाने की अगर अनुमति नहीं थी तो इसे रोका क्यों नहीं गया? पुरानी इमारत में छात्रों को रहते बेसमेंट में काम की इजाजत कैसे दी गई?
हादसे से पहले शायह ही इमारत की जांच करने वाला कोई पहुंचा हो. बिल्डिंग के बेसमेंट में पानी भरा होने के बावजूद काम चल रहा था. जबकि हादसे के वक्त छात्र कमरों में मौजूद थे तो अब सवाल उठता है इन मौतों का जिम्मेदार कौन है?
आखिर कितने बेकसूर छात्रों की जिंदगी ज्यादा किराए के लालच में इस तरह दांव पर लगाई जाती रहेंगी? दिल्ली में लगातार हो रहे इन हादसों की जिम्मेदारी कब और कैसे तय होगी?
घर बनाने के नियमों को लेकर सवाल
अब राजधानी दिल्ली में घर बनाने के नियमों को लेकर सवाल उठने लगे हैं. सवाल ये है कि क्या बने हुए घर के नीचे बेसमेंट बनाया जा सकता है? क्या इसके लिए कोई कानूनी अनुमति लेनी होगी और अगर बिना अनुमति के बेसमेंट बना दिया तो क्या कार्रवाई हो सकती है? ये किसकी जिम्मेदारी थी?
सत्य निकेतन दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास बसा प्रमुख छात्र इलाका है. यहां बड़ी संख्या में छात्र PG और हॉस्टल में रहते हैं. इसी वजह से यहां दिनभर छात्रों की आवाजाही रहती है.
अवैध निर्माण पर कब लगाम?
दिल्ली में बेसमेंट बनाने के लिए संबंधित अथॉरिटी से संशोधित बिल्डिंग प्लान की मंजूरी की जरूरत होती है. हालांकि इस हादसे ने देश की राजधानी को एक बार फिर हिला दिया है. लोग डरे हुए हैं, क्योंकि वो जिन इमारतों में रह रहे हैं, उनका भी ऐसा ही अंजाम हो सकता है.
दिल्ली में ऐसे हादसे तब तक होते रहेंगे जब तक अवैध निर्माण पर लगाम नहीं लगती. दिल्ली में 75 लाख इमारतें बताई जाती हैं. दुर्भाग्य ये है कि चंद इमारतें ही सभी नियमों को पूरा करे हुए बनी हैं. इसलिए एक्सपर्ट की मांग है कि सरकार बाकी इमारतों को लेकर अभियान चलाए, क्योंकि 40-50 साल पुरानी हो चुकी इमारतों की दिल्ली में बहुत बड़ी संख्या है.
—- समाप्त —-

