Drishyam 3: अजय देवगन या मोहनलाल, किसकी दृश्यम 3 में कितना दम? जानिए

Drishyam 3: अजय देवगन या मोहनलाल, किसकी दृश्यम 3 में कितना दम? जानिए

Drishyam 3: अजय देवगन या मोहनलाल, किसकी दृश्यम 3 में कितना दम? जानिए

मोहनलाल और अजय देवगन

Hindi Drishyam 3 Vs Malyalam Drishyam 3: भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी सस्पेंस और माइंड-गेम्स का जिक्र होगा, ‘दृश्यम’ फ्रेंचाइजी का नाम सबसे ऊपर रहेगा. निर्देशक जीतू जोसेफ की लिखी ये कहानी जब अपने तीसरे पड़ाव पर पहुंची, तो इसने एक बार फिर साबित कर दिया कि एक ही मूल पटकथा को दो अलग-अलग संस्कृतियों और सिनेमाई शैलियों में कितने शानदार तरीके से ढाला जा सकता है. मोहनलाल की ओरिजिनल मलयालम ‘दृश्यम 3’ और अजय देवगन की हिंदी ‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ दोनों ही फिल्में दर्शकों के सामने आ चुकी हैं, और दोनों को देखने के बाद एक बात साफ हो जाती है कि दोनों ही वर्जन अपने-अपने दर्शकों को बिल्कुल अलग और बेमिसाल अनुभव देते हैं.

यहां सबसे दिलचस्प बात ये है कि भले ही दोनों फिल्में एक ही नाम और ब्रांड के तहत आई हों, लेकिन ‘दृश्यम 3’ का यह तीसरा भाग कोई फ्रेम-टू-फ्रेम रीमेक नहीं है. मलयालम वर्ज़न की पूरी कहानी और स्क्रीनप्ले जहां खुद मूल लेखक-निर्देशक जीतू जोसेफ ने अपने अनूठे अंदाज़ में लिखी है, वहीं हिंदी वर्ज़न ‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ को स्क्रीनराइटर आमिल कीयान खान ने निर्देशक अभिषेक पाठक और परवेज़ शेख के साथ मिलकर एक पूरी तरह स्वतंत्र और नए ओरिजिनल स्क्रीनप्ले के तौर पर तैयार किया है. यही वजह है कि दोनों तरफ की कहानी का ताना-बाना, जांच का रुख और यहां तक कि क्लाइमैक्स का झटका भी एक-दूसरे से पूरी तरह जुदा नजर आता है. यानी दोनों फिल्मों की रीढ़ भले ही जीतू जोसेफ का मास्टरमाइंड प्लॉट है, लेकिन दोनों का ट्रीटमेंट और टोन एक-दूसरे से काफी अलग है,

मलयालम वर्जन (जॉर्जकुट्टी): मोहनलाल की फिल्म बेहद शांत, रियलिस्टिक और ठहराव के साथ आगे बढ़ती है. जॉर्जकुट्टी का किरदार एक आम केबल ऑपरेटर का है, जो अंदर से अपने परिवार के भविष्य को लेकर बुरी तरह डरा हुआ है, लेकिन चेहरे पर वही रोजमर्रा की सादगी और मासूमियत ओढ़े रहता है. मोहनलाल की एक्टिंग ऐसी है कि दर्शक हर पल उनके दिल की धड़कन महसूस कर सकते हैं.

हिंदी वर्जन (विजय सालगांवकर): वहीं दूसरी तरफ, अभिषेक पाठक के निर्देशन में अजय देवगन का विजय सालगांवकर बॉलीवुड के सांचे में ढला एक ज्यादा मुखर, दृढ़निश्चयी और स्क्रीन पर आत्मविश्वास से लबरेज किरदार है. हिंदी वर्जन की पेसिंग तेज है, बैकग्राउंड स्कोर हाई-ऑक्टेन है और इसमें तब्बू, रजत कपूर और पुलिसिया दबाव के बीच आमने-सामने के टकराव को बहुत बड़े कैनवस पर पेश किया गया है.

एक जगह भरपूर ड्रामा, दूसरी जगह दिमाग को घूमा दे ऐसा ट्विस्ट

फिल्म के सबसे अहम हिस्से यानी क्लाइमैक्स की बात करें तो दोनों ही फिल्मों की अपनी-अपनी ताकत है. हिंदी वर्जन ‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ बड़े पर्दे के हिसाब से दर्शकों को एक शानदार थियेट्रिकल अनुभव देती है. इसमें ड्रामेटिक टेंशन और इमोशनल टकराव को इस तरह पिरोया गया है कि दर्शक अपनी सीट से चिपके रहते हैं. हालांकि, जो दर्शक लगातार क्राइम थ्रिलर सिनेमा देखते हैं, उन्हें ये अंत कुछ हद तक ऐसा लग सकता है, जिसका अंदाजा लगाया जा सकता था (प्रेडिक्टेबल), फिर भी स्क्रीन पर जिस एनर्जी और तेवर के साथ इसे पेश किया गया, वो सिनेमाघरों में तालियां और सीटियां बटोरने में पूरी तरह कामयाब रहता है.

दूसरी तरफ, मलयालम वर्जन की एंडिंग बिल्कुल अलग स्तर की दिमागी कसरत कराती है. जीतू जोसेफ ने जिस तरह से लीगल लूपहोल्स और जॉर्जकुट्टी की दूरंदेशी को बांधा है, वो अंत दर्शकों को हैरान कर देता है. स्क्रीन पर जो घटता है, दर्शक पहले से उसका कयास भी नहीं लगा सकते कि कहानी इस दिशा में भी मुड़ सकती है. वो एक ऐसा अनसोचा झटका है जो फिल्म खत्म होने के बाद भी कई दिनों तक जेहन में घूमता रहता है.

किसे कौन सा वर्जन देखना चाहिए?

दोनों फिल्मों को देखने के बाद ये कहना बिल्कुल सही होगा कि कोई भी किसी से कम नहीं है, बल्कि दोनों की दिशाएं अलग हैं.

अगर आप रियलिस्टिक सिनेमा और प्योर माइंड-गेम के मुरीद हैं: तो मोहनलाल की मलयालम वाली ‘दृश्यम 3’ आपके लिए एक मास्टरक्लास है, जहां बिना किसी तामझाम के सिर्फ राइटिंग और एक्टिंग का जादू चलता है.

अगर आप लार्जर-दैन-लाइफ थ्रिलर और थिएट्रिकल रोमांच पसंद करते हैं: तो अजय देवगन की हिंदी ‘दृश्यम 3’ आपको एक पल के लिए भी बोर नहीं होने देती और अपनी तेज रफ्तार और दमदार डायलॉग डिलीवरी से पूरा पैसा वसूल कराती है. कुल मिलाकर, ‘दृश्यम 3’ के दोनों ही वर्जन अपनी-अपनी जगह खरे उतरते हैं और ये भारतीय सिनेमा की उस खूबसूरती को दर्शाते हैं जहां एक ही सस्पेंस को दो अलग-अलग दिग्गजों ने अपने नायाब हुनर से अमर बना दिया है.

मोहम्मद आसिफ

मोहम्मद आसिफ

मोहम्मद आसिफ टीवी9 हिंदी डॉट कॉम में नवंबर 2022 से एंटरटेनमेंट सेक्शन के हेड के तौर पर अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं. वो एंटरटेनमेंट जगत से जुड़ी हलचल पर पैनी नजर रखते हैं. सिनेमा और सितारों में आसिफ खास दिलचस्पी रखते हैं. आसिफ को नई नई वेब सीरीज और फिल्में देखना काफी पसंद है. टीवी9 हिंदी डॉट कॉम से पहले आसिफ एबीपी न्यूज़ की हिंदी वेबसाइट में एबीपी लाइव डॉट कॉम में काम कर रहे थे.

एबीपी लाइव डॉट कॉम में आसिफ ने करीब साढ़े 6 साल तक काम किया है. साल 2016 में बतौर ट्रेनी जर्नलिस्ट आसिफ ने एबीपी न्यूज की वेबसाइट से ही अपने करियर की शुरुआत की थी. एबीपी में आसिफ ने एंटरटेनमेंट सेक्शन संभाला. इसके अलावा वहां होम पेज और स्पोर्ट्स सेक्शन में भी उन्होंने काम किया.

आसिफ ने दिल्ली के इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मास कम्यूनिकेशन से हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है. इससे पहले उन्होंने जामिया मिल्लिया इस्लामिया से मास मीडिया में ग्रैजुएशन की डिग्री हासिल की. आसिफ ने स्कूल की पढ़ाई भी देश की राजधानी दिल्ली से ही की है. उन्हें को क्रिकेट खेलना, ओटीटी पर कंटेंट देखना, परिवार और दोस्तों के साथ वक्त बिताना पसंद है.

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