न दफ्तर, न स्टाफ… दो दोस्तों ने 365 दिन में बेच दीं 200 वेबसाइट! जानिए कैसे बदला पूरा बिजनेस – ai automation website development 200 sites 12 months coding edmm

न दफ्तर, न स्टाफ… दो दोस्तों ने 365 दिन में बेच दीं 200 वेबसाइट! जानिए कैसे बदला पूरा बिजनेस – ai automation website development 200 sites 12 months coding edmm

एक जमाना था जब साल में 200 वेबसाइट्स बनाने और बेचने के लिए पूरी-पूरी IT कंपनी, दर्जनों सेल्समैन और कोडिंग करने वाले डेवलपर्स की बड़ी फौज की जरूरत पड़ती थी, लेकिन टेक्नोलॉजी के इस दौर में अब खेल पूरी तरह से बदल चुका है.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर ‘u/Murky_Explanation_73’ नाम के एक यूजर के दावे ने पूरी टेक दुनिया को हैरान कर दिया है. उसने दावा किया है कि उसने और उसके एक साथी ने मिलकर सिर्फ 12 महीनों के अंदर करीब 200 वेबसाइट्स तैयार करके बेच दीं. इसके ल‍िए कोई भारी-भरकम टीम नहीं, कोई लंबा-चौड़ा दफ्तर नहीं खोला बल्क‍ि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन से ये कारनामा कर द‍िखाया. 

रेडिट यूजर के मुताबिक, उन्होंने सबसे पहले क्लाइंट्स को मैसेज भेजने का पुराना तरीका बंद किया. अक्सर डेवलपर्स मैसेज करते हैं कि हम आपकी वेबसाइट रीडिजाइन कर सकते हैं. लेकिन दो लोगों की टीम ने बिल्कुल नया रास्ता चुना. ऑटोमेटेड एनालिसिस से उनके AI सिस्टम ने हजारों बिजनेस वेबसाइट्स को खुद स्कैन किया.

सिस्टम ने वेबसाइट्स की कमियां पकड़ीं जैसे मोबाइल में ठीक से न चलना, खराब SEO, लोड होने में देरी और लेआउट की गलतियां. अब क्लाइंट्स के पास सीधे उनकी वेबसाइट की कमियों की रिपोर्ट भेजी गई. जब क्लाइंट को अपनी असली समस्या दिखी, तो डील अपने आप पक्की होती चली गई.

वर्डप्रेस डेवलपर से बने ‘सिस्टम बिल्डर’

रेडिट यूजर ने बताया कि वह पहले एक फुल-टाइम वर्डप्रेस डेवलपर था, जो दिन-रात खुद कोडिंग करके वेबसाइट्स बनाता था. लेकिन अब उसने कोडिंग का पूरा काम AI को सौंप दिया है. 

वेबसाइट्स बनाने, प्रमोट करने के लिए यूज क‍िए ये AI टूल्स

Apollo: लीड्स और क्लाइंट्स ढूंढने के लिए.
Swokei: वेबसाइट्स के एनालिसिस और रीचआउट के लिए.
Soro: ऑटोमेटेड SEO ब्लॉगिंग के लिए.
Claude Code: कोडिंग और टेस्टिंग संभालने के लिए.
Cloudflare: होस्टिंग संभालने के लिए.

बता दें कि एंथ्रोपिक का ‘क्लाउड कोड’ ऐसा एजेंटिक टूल है जो खुद कोड पढ़ता है, उसमें बदलाव करता है और बिना इंसान की मदद के कठिन काम निपटा देता है.डेवलपर्स ने SEO ब्लॉग्स लिखने के लिए भी ऑटोमेटेड टूल्स का सहारा लिया, जिससे लोग खुद-ब-खुद गूगल सर्च के जरिए उनकी वेबसाइट्स तक पहुंचने लगे. हालांकि, इस मामले में एक चेतावनी ध्यान में रखना बेहद जरूरी है:

जैसे गूगल की गाइडलाइंस के अनुसार गूगल सिर्फ संख्या के आधार पर बनाई गई साइट्स को पसंद नहीं करता. इसमें बिना किसी काम की जानकारी के सिर्फ AI से धड़ाधड़ पेज छापना गूगल की स्पैम नीतियों के खिलाफ आ सकता है. गूगल हमेशा इंसान के काम आने वाले ओरिजिनल कंटेंट को ही तरजीह देता है.

रेडिट यूजर का यह दावा सिर्फ वेबसाइट्स बेचने का नहीं है, बल्कि यह भविष्य के कामकाज की बदलती तस्वीर है. आज के दौर में जीत उसकी नहीं होगी जो सबसे तेज हाथों से कोडिंग करता है, बल्कि बाजी वही मारेगा जो ऐसा सिस्टम बना सकता है जो खुद-ब-खुद सारा काम कर सके. अगर आप सिर्फ वेबसाइट बनाना जानते हैं, तो इस भीड़ में पीछे छूट सकते हैं, लेकिन अगर आप क्लाइंट की समस्या समझकर AI से समाधान निकालना सीख गए, तो जीत आपकी तय है!

(नोट: रेडिट यूजर के इन आंकड़ों और दावों की कोई आधिकारिक वित्तीय पुष्टि नहीं की गई है)

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